Biography

APJ Abdul Kalam Ki Kahani — Ek Machhuare Ka Beta Kaise Bana India Ka President

Rajhussain Kanani · 09-March-2026 10 min read
APJ Abdul Kalam Ki Kahani — Ek Machhuare Ka Beta Kaise Bana India Ka President

क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसा बच्चा जिसके घर में रोटी के लिए भी संघर्ष था… जो सुबह अँधेरे में उठकर अखबार बेचता था… जिसे Indian Air Force ने reject कर दिया था… वो एक दिन इस पूरे देश का राष्ट्रपति बन जाएगा?

ये कोई फ़िल्मी कहानी नहीं है। ये उस इंसान की सच्ची कहानी है जिसने साबित कर दिया कि सपने देखने के लिए अमीर होना ज़रूरी नहीं — बस हिम्मत और मेहनत होनी चाहिए।

ये है APJ Abdul Kalam की कहानी — India के Missile Man की, और उस बच्चे की जो रामेश्वरम की तंग गलियों से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुँचा।

चलिए, आज की ये प्रेरणादायक कहानी शुरू करते हैं…


एक छोटे से द्वीप पर एक बड़े सपने का जन्म

सन् 1931। तमिलनाडु का एक छोटा-सा शहर — रामेश्वरम

समंदर के किनारे बसा ये शहर, मंदिरों की घंटियों और मछुआरों की नावों के लिए जाना जाता था। यहीं एक मध्यमवर्गीय मुस्लिम परिवार में एक बच्चे ने आँखें खोलीं — Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam

उनके पिता Jainulabdeen एक साधारण नाविक थे जो हिंदू तीर्थयात्रियों को नाव से रामेश्वरम मंदिर ले जाते थे। न कोई बड़ी दौलत, न कोई ऊँची पहुँच। लेकिन घर में था — ईमानदारी, सादगी, और आस्था।

माँ Ashiamma रोज़ खुदा से दुआ माँगती थीं कि उनका बेटा कुछ बड़ा करे।

और उस बेटे के दिल में था — आसमान छूने का जुनून।

जब छोटे Kalam छत पर बैठकर पंछियों को उड़ते देखते थे, तो उनके मन में एक ही सवाल उठता था — “मैं भी कभी उड़ सकता हूँ क्या?”


अखबार बेचने वाला बच्चा जो पढ़ाई नहीं छोड़ता था

घर की हालत ठीक नहीं थी। Kalam ने बहुत कम उम्र में ही ये समझ लिया कि अगर पढ़ना है तो खुद भी कुछ करना होगा।

हर सुबह तड़के चार बजे वो उठते थे। नींद से भरी आँखें, ठंडी हवा, अँधेरी सड़क — और हाथ में अखबारों का बंडल।

रामेश्वरम रेलवे स्टेशन पर आने वाली ट्रेनों से अखबार उठाते और पूरे शहर में बेचते। जो पैसे मिलते, वो घर में देते।

उनके एक टीचर थे — Sivasubramania Iyer। एक दिन Kalam को बहुत भूख लगी थी, पर पैसे नहीं थे। टीचर ने देखा तो घर ले गए, अपनी पत्नी से खाना खिलवाया। उस दिन Kalam की आँखें भर आईं।

टीचर ने कहा था — “Kalam, अगर तुम ठान लो, तो दुनिया की कोई ताकत तुम्हें रोक नहीं सकती।”

वो बात Kalam के दिल में उतर गई — हमेशा के लिए।

School में Kalam औसत छात्र थे — न topper, न कोई special talent। लेकिन एक चीज़ थी जो सबसे अलग थी — उनकी लगन और जिज्ञासा। Physics उन्हें बेहद पसंद थी। आसमान, तारे, rockets — ये सब उन्हें खींचते थे।


कॉलेज की फ़ीस और एक बहन की क़ुर्बानी

Kalam की एक बड़ी बहन थीं — Zohara

जब Kalam को Madras Institute of Technology (MIT, Chennai) में दाखिला मिला, तो घर में ख़ुशी भी थी और चिंता भी। फ़ीस थी 1000 रुपये — उस ज़माने में एक बहुत बड़ी रकम।

पिता के पास इतने पैसे नहीं थे।

Zohara ने बिना एक पल सोचे अपने सोने के ज़ेवर गिरवी रख दिए।

Kalam की आँखें उस दिन रो पड़ी थीं। उन्होंने बहन के हाथ थाम कर कहा था — “मैं तेरे इस एहसान को कभी नहीं भूलूँगा। मैं कुछ ऐसा करूँगा जिससे तुझे गर्व हो।”

MIT में Kalam ने Aeronautical Engineering पढ़ी। यहाँ उनकी ज़िंदगी बदलने लगी। उन्होंने देखा — rockets, aircraft, missiles। और उनका सपना और गहरा हो गया।


वो rejection जिसने ज़िंदगी की दिशा बदल दी

1958 में Kalam ने Indian Air Force में Pilot बनने के लिए apply किया।

Selection के लिए 25 candidates थे। सिर्फ 8 को चुना जाना था।

Kalam 9th आए।

एक नंबर से चूक गए।

उनका दिल टूट गया। वो Rishikesh गए — स्वामी शिवानंद से मिले। स्वामीजी ने उन्हें देखा और कहा —

“जो तुम्हारा नहीं था, वो मिला नहीं। जो तुम्हारा है, वो तुमसे कोई नहीं छीन सकता। जाओ — तुम्हारी किस्मत तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।”

Kalam ने वो rejection accept की। और फिर — DRDO (Defence Research and Development Organisation) join किया।

यहीं से शुरू हुई वो यात्रा जो उन्हें Missile Man of India बनाने वाली थी।


ISRO, DRDO और India के Missile Man की कहानी

1969 में Kalam ISRO से जुड़े। यहाँ उन्होंने India के पहले Satellite Launch Vehicle — SLV-3 को design करने में अहम भूमिका निभाई।

1980 में SLV-3 ने Rohini Satellite को सफलतापूर्वक orbit में पहुँचाया।

पूरा देश झूम उठा।

लेकिन Kalam यहीं नहीं रुके।

DRDO में वापस आकर उन्होंने India के Integrated Guided Missile Development Programme (IGMDP) की अगुआई की। इस programme के तहत बने —

  • 🚀 Agni — भारत की पहली ballistic missile
  • 🚀 Prithvi — surface-to-surface missile
  • 🚀 Akash, Trishul, Nag — और भी शक्तिशाली हथियार

और फिर आया 1998 का वो ऐतिहासिक दिनPokhran Nuclear Test।

पूरी दुनिया हैरान थी। India ने दिखा दिया कि वो किसी से कम नहीं। और इस पूरे mission की रीढ़ थे — Dr. APJ Abdul Kalam।

तभी से पूरी दुनिया उन्हें जानने लगी — India के Missile Man के नाम से।

Kalam खुद कहते थे —

“सपने वो नहीं जो नींद में आते हैं। सपने वो हैं जो नींद नहीं आने देते।”


एक वैज्ञानिक जो बन गया देश का राष्ट्रपति

2002 में एक ऐसा हुआ जो किसी ने सोचा भी नहीं था।

India के 11वें राष्ट्रपति के लिए नाम तय हो रहे थे। और सबकी नज़र उस वैज्ञानिक पर थी जिसने rockets बनाए थे।

Dr. APJ Abdul Kalam — India के राष्ट्रपति।

25 July 2002 को वो राष्ट्रपति भवन में प्रवेश करने वाले पहले scientist-राष्ट्रपति बने।

वो बच्चा जो रामेश्वरम की गलियों में अखबार बेचता था… आज India के First Citizen थे।

उस दिन रामेश्वरम में उनकी बूढ़ी माँ की आत्मा को — जो अब इस दुनिया में नहीं थीं — ज़रूर सुकून मिला होगा।

राष्ट्रपति बनने के बाद भी Kalam वही रहे — सादे, विनम्र, और बच्चों के Kalam Uncle। वो हर जगह students से मिलते, उनसे बात करते, उन्हें inspire करते।

वो कहते थे —

“मैं एक Teacher था, हूँ, और हमेशा रहूँगा।”


अंतिम विदाई — Teaching करते हुए आखिरी सफर

27 July 2015।

Kalam IIM Shillong में students को lecture दे रहे थे। विषय था — “Making Earth a Better Place to Live.”

और अचानक… वो गिर पड़े।

उसी अवस्था में — teaching करते हुए — India के Missile Man ने इस दुनिया को अलविदा कहा।

उनकी उम्र थी 83 साल।

पूरा देश रो पड़ा।

लेकिन Kalam जाते-जाते भी एक सन्देश दे गए — कि काम करते हुए जीना और काम करते हुए जाना — यही असली ज़िंदगी है।

उनके शब्द आज भी गूँजते हैं —

“जब तक India दुनिया में खड़े होकर बोल नहीं सकता — तब तक कोई हमारी इज़्ज़त नहीं करेगा। ताकत ताकत का सम्मान करती है।”


APJ Abdul Kalam की कहानी से हम क्या सीख सकते हैं?

  • ग़रीबी सपनों की दुश्मन नहीं होती: Kalam के पास न पैसा था, न connections — फिर भी वो India के राष्ट्रपति बने। सपने देखने के लिए अमीरी की नहीं, हिम्मत की ज़रूरत होती है।
  • Rejection एक नई दिशा है, अंत नहीं: Air Force ने reject किया तो DRDO और ISRO मिले। जब एक दरवाज़ा बंद हो, तो घबराएँ नहीं — किस्मत कहीं और ले जाती है।
  • मेहनत और लगन कभी झूठ नहीं बोलती: Kalam ने कभी shortcuts नहीं लिए। रात-रात जागकर काम किया, तब जाकर India को Agni और Prithvi मिले।
  • विनम्रता ही असली महानता है: राष्ट्रपति बनने के बाद भी वो students के बीच जाते, उनसे सीखते, उन्हें सिखाते। ऊँचाई पर पहुँचकर भी ज़मीन से जुड़े रहे।
  • परिवार का प्यार सबसे बड़ी ताकत है: बहन के ज़ेवर ने उन्हें MIT पहुँचाया। उन्होंने वो क़ुर्बानी कभी नहीं भुलाई — और वो एहसान उन्हें हमेशा आगे बढ़ने की ऊर्जा देता रहा।
  • अंत तक काम करते रहो: Kalam ने 83 साल की उम्र में भी teaching नहीं छोड़ी। उनकी ज़िंदगी का आखिरी पल भी एक classroom में बीता।

एक आखिरी बात…

Kalam की कहानी सिर्फ एक इंसान की कहानी नहीं है।

ये कहानी है उन लाखों बच्चों की जो छोटे शहरों में बड़े सपने देखते हैं। जो रात को टूटे बल्ब की रोशनी में पढ़ते हैं। जो हर rejection के बाद एक बार और उठते हैं।

Kalam ने हमें दिखाया — रामेश्वरम से राष्ट्रपति भवन तक का रास्ता कोई नहीं रोक सकता, अगर इरादा पक्का हो।

क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसा पल आया है जब लगा कि सब कुछ ख़त्म हो गया — लेकिन आपने हार नहीं मानी? नीचे comment में ज़रूर बताइए। आपकी कहानी किसी और को inspire कर सकती है।


APJ Abdul Kalam से जुड़े कुछ सवाल

Q: APJ Abdul Kalam का जन्म कहाँ और कब हुआ था? Dr. APJ Abdul Kalam का जन्म 15 October 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ था। उनके पिता Jainulabdeen एक नाविक थे जो तीर्थयात्रियों को नाव से मंदिर ले जाते थे।

Q: APJ Abdul Kalam को Missile Man of India क्यों कहा जाता है? Kalam ने India के Integrated Guided Missile Development Programme की अगुआई की जिसमें Agni, Prithvi, Akash, Trishul और Nag जैसी missiles बनाई गईं। 1998 के Pokhran Nuclear Test में भी उनकी अहम भूमिका थी। इसीलिए उन्हें Missile Man of India कहा जाता है।

Q: Kalam की zindagi में सबसे बड़ा rejection कौन-सा था? Indian Air Force में Pilot बनने की selection में Kalam 9th position पर रहे — सिर्फ 8 को चुना जाना था। एक नंबर से वो चूक गए। यही rejection उन्हें DRDO और बाद में ISRO तक ले गया।

Q: APJ Abdul Kalam कब राष्ट्रपति बने और उनका कार्यकाल कब तक था? Kalam 25 July 2002 को India के 11वें राष्ट्रपति बने और 25 July 2007 तक इस पद पर रहे। वो देश के पहले scientist-राष्ट्रपति थे।

Q: APJ Abdul Kalam की मृत्यु कैसे हुई? 27 July 2015 को Kalam IIM Shillong में students को lecture दे रहे थे। lecture के दौरान वो suddenly गिर पड़े और उन्हें hospital ले जाया गया जहाँ उन्होंने अंतिम साँस ली। वो 83 साल के थे।

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