जो माँगा था, वही मिला
काशी के घाटों पर शाम उतर रही थी जब सेठ धनराज शर्मा ने अपने नौकर से कहा — “रथ रोको।”…
No stories found. Try different keywords.
Category
काशी के घाटों पर शाम उतर रही थी जब सेठ धनराज शर्मा ने अपने नौकर से कहा — “रथ रोको।”…
रात के तीसरे पहर में राजा विक्रमादित्य ने अपना मुकुट उतारा, अपनी अंगूठियाँ उतारीं, और एक फटी हुई चादर ओढ़…
पहले दिन वो सिक्का मिट्टी से ऐसे निकला जैसे कोई आलू निकलता है। हलधर की कुदाल टकराई, एक खनखनाहट हुई…
जंगल के उस कोने में कोई नहीं आता था जहाँ हरिया लकड़ी काटने जाता था। पेड़ वहाँ टेढ़े-मेढ़े थे, ज़मीन…
क्या आपने कभी देखा है कि बच्चे कितने सवाल पूछते हैं? “यह क्यों होता है?”, “वो कैसे होता है?”, “यह…
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हमें बिना मेहनत के सब कुछ मिल जाए, तो क्या हम उसकी कदर…
क्या आपने कभी सोचा है कि कभी-कभी जो हमारे पास होता है, वही सबसे कीमती होता है? और जब हम…
क्या आपने कभी सोचा है कि जो इंसान सबसे ज़्यादा पढ़ा-लिखा हो, वही कभी-कभी सबसे बड़ी बेवकूफी कर बैठता है?…
क्या आपने कभी सोचा है कि मुश्किल के वक्त में सच्चा दोस्त कौन होता है? जब तूफान आता है, तो…
क्या आपने कभी सोचा है कि इस दुनिया में सबसे मीठी चीज़ आखिर है क्या? शहद? गुड़? पके हुए आम?…