राजा हरिश्चंद्र की कहानी — जिस राजा ने सब कुछ दिया, उसे अंत में माँगना पड़ा
मुकुट उतारना आसान था। मुश्किल यह थी कि उसे रखें कहाँ। अयोध्या के राजसिंहासन के सामने खड़े हरिश्चंद्र के हाथ…
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मुकुट उतारना आसान था। मुश्किल यह थी कि उसे रखें कहाँ। अयोध्या के राजसिंहासन के सामने खड़े हरिश्चंद्र के हाथ…
समुद्र के ऊपर हवा में कोई दीवार नहीं थी, फिर भी हनुमान को रुकना पड़ा। महेंद्र पर्वत से छलाँग लगाए…
रात का तीसरा पहर बीत चुका था, और हनुमान के पास अब बस इतना समय था जितना एक दीया बुझने…
सभा में सैकड़ों आसन थे, पर उस एक वानर के लिए एक भी नहीं। हनुमान जी को रस्सियों से बाँधकर…
पहला घुमाव सबसे भारी था। मंदराचल पर्वत, जिसकी चोटी बादलों में खोई रहती थी, क्षीरसागर के बीचों-बीच खड़ा था —…
खंभा चटका नहीं। वह गरजा। हिरण्यकशिपु की मुट्ठी अभी उस पर पड़ी ही थी कि सभा-भवन के बीचों-बीच खड़ा वह…
पाँच बरस के बच्चे के लिए महल की सीढ़ियाँ बहुत ऊँची होती हैं। उस शाम ध्रुव ने उन्हें पहली बार…
यम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा था। लाखों वर्षों में, लाखों आत्माएँ उनकी रस्सी में बँधीं, और वो चल…
समुद्र की लहरें किनारे से टकरा रही थीं, और उससे भी बड़ी लहर वानर सेना के भीतर चल रही थी…
अयोध्या के राजदरबार में उस दिन हँसी रुक नहीं रही थी। चंद्रहास नाम का एक युवा दरबारी सबसे आगे बैठा…