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लालची कुत्ता की कहानी — जब एक कुत्ते ने खोया अपना खाना नदी में

Rajhussain Kanani · 11-March-2026 6 मिनट में पढ़ें
लालची कुत्ता की कहानी — जब एक कुत्ते ने खोया अपना खाना नदी में

क्या आपने कभी सोचा है कि कभी-कभी जो हमारे पास होता है, वही सबसे कीमती होता है? और जब हम और ज़्यादा पाने की लालच में पड़ जाते हैं — तो जो था, वो भी चला जाता है?

यह कहानी है एक ऐसे कुत्ते की, जिसने लालच में एक बड़ी गलती की। और उस गलती ने उसे वो सबक सिखाया, जो शायद उसे पहले ही सीख लेना चाहिए था।

तो बच्चों, चलिए आज की यह मज़ेदार और सीख देने वाली कहानी शुरू करते हैं!


एक भूखा कुत्ता और एक ज़बरदस्त हड्डी

किसी गाँव के पास एक छोटी-सी बस्ती थी। उस बस्ती में रहता था काला — एक मोटा-ताज़ा, काले रंग का कुत्ता।

काला बहुत चालाक था… कम से कम वो खुद ऐसा ही सोचता था!

एक दिन, काला सुबह-सुबह खाने की तलाश में निकला। इधर-उधर सूँघता रहा, गलियों में घूमता रहा। तभी उसकी नज़र पड़ी एक बड़ी, मोटी, रसीली हड्डी पर — जो कसाई की दुकान के बाहर पड़ी थी।

काला की आँखें चमक उठीं। मुँह में पानी आ गया।

उसने इधर-उधर देखा — कोई नहीं था। झट से हड्डी उठाई, मुँह में दबाई, और दौड़ लगा दी!

“आज तो मेरे जैसा कोई नहीं!” — काला मन ही मन खुश हो रहा था।


पुल पार करना और नदी की वो मुसीबत

गाँव के किनारे एक नदी थी, और नदी के ऊपर एक पुराना लकड़ी का पुल।

काला उस पुल पर चढ़ा। हड्डी अभी भी उसके मुँह में थी। क़दम-क़दम चलता रहा, खुद को दुनिया का सबसे होशियार कुत्ता समझता रहा।

तभी उसने नीचे झाँका।

नदी का पानी एकदम साफ़ था — दर्पण की तरह!

और उस दर्पण में काले को दिखा… एक और कुत्ता!

वो कुत्ता भी काले जैसा ही था — काला, मोटा, और उसके मुँह में भी एक हड्डी!

“अरे! यह कौन है?!” — काला रुक गया।

“और… इसके मुँह में हड्डी तो मेरी हड्डी से भी बड़ी लग रही है!”


लालच का वो ख़तरनाक पल

बच्चों, यहीं से काले की असली मुसीबत शुरू हुई।

वो सोचने लगा — “एक हड्डी तो मेरे पास है। अगर मैंने उस दूसरे कुत्ते की हड्डी भी छीन ली — तो मेरे पास दो हड्डियाँ हो जाएंगी! दो!! दो मतलब — आज का खाना भी, कल का खाना भी!”

लालच उसके दिमाग पर चढ़ गई।

उसने ज़ोर से भौंकने की तैयारी की। पूरी साँस अंदर खींची। आँखें बड़ी-बड़ी कीं। और फिर…

“भौंऊऊऊऊऊ!!!”

एक ज़ोरदार भौंकना निकला!

लेकिन जैसे ही मुँह खुला — हड्डी सीधे नदी में!

छपाक!

पानी में एक ज़ोरदार आवाज़ आई, और काले की प्यारी, रसीली, बड़ी हड्डी… नदी की गहराई में डूब गई।

नीचे का “दूसरा कुत्ता”? वो भी गायब हो गया। क्योंकि वो कुत्ता कोई और नहीं — काले की अपनी परछाई थी!

काला हैरान होकर पुल पर खड़ा रहा। मुँह खुला का खुला। नदी में बस लहरें थीं।


घर वापसी — भूखा, शर्मिंदा, और समझदार

काला धीरे-धीरे पुल से उतरा।

पेट में भूख थी। दिल में शर्म थी।

घर के रास्ते में उसे सब मिले — मीठू बिल्ली जो छत पर बैठी मछली खा रही थी, गोलू खरगोश जो गाजर चबा रहा था, और छोटी चिड़िया जो दाने चुग रही थी।

सब अपने-अपने खाने में खुश थे।

काला घर आया और अपनी पुरानी चटाई पर बैठ गया। पेट में गुड़-गुड़ हो रही थी।

“काश… मैंने उस हड्डी को ही खा लिया होता। वो मेरी थी। असली थी। और रसीली थी!”

उसी पल मालकिन बाहर आईं और एक छोटी-सी रोटी काले के सामने रख दी।

काले ने उसे देखा। आज उस रोटी में भी उसे किसी खज़ाने जैसी खुशबू आई।

उसने चुपचाप, धीरे-धीरे, पूरी कृतज्ञता के साथ वो रोटी खाई।

और उस दिन उसने तय किया — “जो मेरे पास है, वही मेरा असली खज़ाना है।”


लालची कुत्ता की कहानी से हम क्या सीख सकते हैं?

  • 🦴 लालच हमेशा नुकसान करती है: काले के पास एक अच्छी हड्डी थी — लेकिन और ज़्यादा पाने की चाहत में वो भी खो बैठा। जब हम जरूरत से ज़्यादा माँगते हैं, तो अक्सर जो है वो भी चला जाता है।
  • 👁️ दिखावे पर भरोसा मत करो: काले ने परछाई को असली कुत्ता समझा। ज़िंदगी में भी कई बार हम झूठी चमक के पीछे भागते हैं — जो असली नहीं होती।
  • 😊 जो है उसमें खुश रहो: मीठू, गोलू, और चिड़िया — सब अपने-अपने खाने में खुश थे। खुशी इसमें नहीं कि हमारे पास सबसे ज़्यादा हो, खुशी इसमें है कि जो है उसकी क़दर हो।
  • 🤔 जल्दबाज़ी में फ़ैसला मत लो: काले ने सोचा नहीं, बस भौंक दिया। ज़िंदगी में भी बिना सोचे किया गया काम पछतावा देता है।
  • 💛 छोटी चीज़ों में भी खुशी ढूँढो: दिन के अंत में एक छोटी रोटी भी काले को खुश कर गई। असली संतोष बाहर नहीं, हमारे मन में होता है।

तो बच्चों, काले की यह कहानी हमें याद दिलाती है — जो हमारे पास है, वो किसी की परछाई से कहीं ज़्यादा असली और कीमती है। लालच करने वाला हमेशा खाली हाथ रह जाता है।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि किसी चीज़ के लिए लालच की और बाद में पछताना पड़ा? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए! 😊


लालची कुत्ता की कहानी से जुड़े कुछ सवाल

Q: लालची कुत्ते ने हड्डी क्यों खोई? लालची कुत्ते ने नदी में अपनी परछाई देखी और उसे दूसरा कुत्ता समझ लिया। वो उसकी हड्डी छीनने के लिए भौंका, और भौंकते वक्त उसके मुँह से उसकी अपनी हड्डी नदी में गिर गई।

Q: इस कहानी का मुख्य संदेश क्या है? इस कहानी का मुख्य संदेश है — लालच बुरी बला है। जो हमारे पास है उसकी क़दर करें। दूसरों की चीज़ें छीनने की कोशिश में हम अपना भी खो देते हैं।

Q: लालची कुत्ते की कहानी किस class के लिए है? यह कहानी खासतौर पर Class 1, 2 और 3 के बच्चों के लिए बहुत उपयुक्त है। यह NCERT और school syllabus में भी शामिल moral story है।

Q: इस कहानी में कुत्ते को क्या दिखा था नदी में? नदी में कुत्ते को अपनी परछाई दिखी थी — जिसे उसने गलती से एक दूसरा कुत्ता समझ लिया। परछाई में भी उसी की तरह मुँह में हड्डी थी, जो उसे अपनी हड्डी से बड़ी लगी।

Q: बच्चों को यह कहानी कैसे समझाएं? बच्चों को यह कहानी सुनाते वक्त परछाई वाले scene को आईने से compare करके समझाएं — जब हम आईने में देखते हैं तो हमारी image दिखती है, असली इंसान नहीं। इससे बच्चे आसानी से समझ जाते हैं।

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