ग्यारह साल की उम्र में नीरज का वज़न उसकी उम्र के हिसाब से काफ़ी ज़्यादा हो चुका था। स्कूल में मज़ाक बनता, रिश्तेदार टोकते, और घर में आख़िर फ़ैसला हुआ — उसे पानीपत के शिवाजी स्टेडियम भेजा जाए, सिर्फ़ दौड़ने और वज़न घटाने के लिए। खांद्रा गाँव के उस मोटे लड़के को कोई नहीं जानता था। किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि यह मामूली सा फ़ैसला आगे चलकर भारत के खेल इतिहास का सबसे बड़ा मोड़ साबित होगा।
हरियाणा के पानीपत ज़िले के इस छोटे से गाँव में सत्रह लोगों का साझा परिवार एक ही घर में रहता था। पिता सतीश कुमार खेत जोतते थे, माँ सरोज देवी घर संभालतीं। न कोई स्टेडियम गाँव में, न कोई कोच, न कोई खेल की परंपरा। बस एक परिवार जो अपने सबसे बड़े पोते को सेहतमंद देखना चाहता था।
शिवाजी स्टेडियम में वो पहला भाला
स्टेडियम में नीरज दौड़ता, सीनियर खिलाड़ियों को देखता — कुछ कबड्डी खेलते, कुछ दौड़ लगाते। एक दिन उसकी नज़र कुछ लड़कों पर पड़ी जो एक लंबी सी छड़ हवा में उछाल रहे थे। भाला हवा में जिस तरह उड़ता था, उस चाल ने नीरज को बांध लिया। उसने पूछा — क्या वो भी फेंक सकता है?
पहला थ्रो कोई पचास-पचपन मीटर का रहा होगा — किसी रिकॉर्ड लायक नहीं, लेकिन काफ़ी था कि जयवीर चौधरी नाम के एक कोच रुक कर देखें। जयवीर ने उसे अपने साथ जोड़ लिया, और कुछ बरस बाद उसे पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भेज दिया, जहाँ कोच नसीम अहमद ने उसकी तकनीक को तराशना शुरू किया। नीरज एक डायरी रखता था — हर हफ़्ते के थ्रो नोट करता, साठ मीटर, फिर सत्तर, फिर अस्सी की सीमा पार होते हुए एक-एक निशान वो अपने हाथ से लिखता जाता।
जब एक कमज़ोर कोहनी ने सब कुछ रोक दिया
2018 आते-आते नीरज राष्ट्रमंडल खेलों और एशियन खेलों का चैंपियन बन चुका था — जकार्ता में सोना जीतकर वो अपने गाँव का नाम देश भर में पहुँचा चुका था। लेकिन 2019 में कोहनी की सर्जरी ने उसे लगभग पूरे सीज़न से बाहर कर दिया। रांची के एक मैदान में लौटते हुए उसने कहा था कि हर झटका एक वापसी की तैयारी होता है। यह वाक्य आगे उसकी पूरी ज़िंदगी का ढंग बन गया — चोट आती, वो लौटता, और पहले से आगे निकल जाता।
टोक्यो की वो शाम, जब भारत का इंतज़ार खत्म हुआ
7 अगस्त 2021 की शाम, टोक्यो के स्टेडियम में जब भाला हवा में गया और 87.58 मीटर पर जाकर गिरा, तो स्टेडियम के बाहर बैठा पूरा भारत एक साथ खड़ा हो गया। यह देश का ट्रैक-एंड-फील्ड में पहला ओलंपिक गोल्ड था — अभिनव बिंद्रा के बाद किसी भारतीय का सिर्फ़ दूसरा व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण। खांद्रा गाँव के उस परिवार के लिए, जिसने कभी अपने बेटे को सिर्फ़ फ़िट रखना चाहा था, यह पल किसी सपने से कम नहीं था।
इसके बाद के बरस लगातार ऊँचाई की सीढ़ी बनते गए — 2022 में ज़्यूरिख़ में डायमंड लीग फ़ाइनल का ख़िताब, 2023 में बुडापेस्ट में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण, 2024 पेरिस ओलंपिक में 89.45 मीटर के करियर-बेस्ट थ्रो के साथ रजत, और मई 2025 में दोहा में आख़िरकार वो पल जिसका पूरा भाला-फेंक जगत इंतज़ार कर रहा था — 90.23 मीटर, नीरज का पहला नब्बे-मीटर थ्रो।
नीरज चोपड़ा की कहानी का सबसे अनकहा मोड़
लेकिन नीरज चोपड़ा की कहानी सिर्फ़ पदकों की फ़ेहरिस्त नहीं है। 2025 खत्म होते-होते कमर की चोट ने उसे लगभग नौ महीने ट्रैक से दूर रख दिया। जून 2026 में वो लौटा — दोहा में चौथा स्थान, फिर ग्लासगो के राष्ट्रमंडल खेलों में 85.83 मीटर के साथ रजत, और अगस्त में लॉज़ान डायमंड लीग में सीज़न का सबसे बेहतरीन थ्रो, 88.05 मीटर, दूसरा स्थान। लग रहा था कि लय आख़िरकार लौट आई है।
फिर, ठीक उसी हफ़्ते जब उम्मीदें बंधने लगी थीं, प्रैक्टिस के दौरान टखने का लिगामेंट फट गया। डॉक्टर से बात करने के बाद नीरज ने ख़ुद अपने सोशल मीडिया पर लिखा कि वो इस सीज़न के बाक़ी हिस्से से बाहर बैठेगा — जिसका मतलब था ब्रुसेल्स का डायमंड लीग फ़ाइनल छूटना, बुडापेस्ट की वर्ल्ड अल्टीमेट चैंपियनशिप छूटना, और सबसे भारी झटका — जापान के आइची-नागोया में होने वाले 2026 एशियन खेल छूटना, जहाँ वो लगातार तीसरी बार गोल्ड जीतने के इरादे से जा रहा था। जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 का चैंपियन इस बार सिर्फ़ टीवी पर अपने साथियों को देख पाएगा।
अपने पोस्ट में नीरज ने लिखा कि लॉज़ान के थ्रो के बाद उसे लग रहा था कि वो आख़िरकार वो लय पा चुका है जिसकी तलाश महीनों से थी — और यह वक्त पर आया झटका सबसे ज़्यादा निराश करता है। लेकिन साथ ही उसने यह भी लिखा कि झटके सफ़र का हिस्सा होते हैं, और अभी उसका पूरा ध्यान ठीक से ठीक होने पर है।
वो लड़का जो कभी अपनी थ्रो की डायरी रखता था, आज भी वैसा ही है — बस अब डायरी की जगह फ़िज़ियोथेरेपी का शेड्यूल है, और अगला पन्ना अभी लिखा जाना बाक़ी है।
इस कथा से जुड़े सवाल
नीरज चोपड़ा ने ओलंपिक गोल्ड मेडल कब जीता था? नीरज चोपड़ा ने 7 अगस्त 2021 को टोक्यो ओलंपिक में 87.58 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता था — यह भारत का ट्रैक-एंड-फील्ड में पहला ओलंपिक गोल्ड था।
नीरज चोपड़ा 2026 एशियन गेम्स में क्यों नहीं खेल रहे? अगस्त 2026 में प्रैक्टिस के दौरान उनके टखने का लिगामेंट फट गया, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उन्होंने पूरे सीज़न से बाहर बैठने का फ़ैसला किया — इसमें एशियन गेम्स, डायमंड लीग फ़ाइनल और वर्ल्ड अल्टीमेट चैंपियनशिप, तीनों शामिल हैं।
नीरज चोपड़ा का सबसे लंबा भाला थ्रो कितने मीटर का है? उनका पर्सनल बेस्ट 90.23 मीटर है, जो उन्होंने मई 2025 में दोहा डायमंड लीग में हासिल किया — यह उनका पहला नब्बे मीटर पार थ्रो था।
