अकबर बीरबल की चतुराई की कहानी — सौ मोहरों की शर्त और वो वाक्य जिसका फ़ैसला नहीं हो सका
उस दिन दीवान-ए-ख़ास में सबसे ख़तरनाक चीज़ कोई तलवार नहीं थी। एक मख़मली थैली थी, जिसमें सौ सोने की मोहरें…
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उस दिन दीवान-ए-ख़ास में सबसे ख़तरनाक चीज़ कोई तलवार नहीं थी। एक मख़मली थैली थी, जिसमें सौ सोने की मोहरें…
मुकुट उतारना आसान था। मुश्किल यह थी कि उसे रखें कहाँ। अयोध्या के राजसिंहासन के सामने खड़े हरिश्चंद्र के हाथ…
समुद्र के ऊपर हवा में कोई दीवार नहीं थी, फिर भी हनुमान को रुकना पड़ा। महेंद्र पर्वत से छलाँग लगाए…
स्क्रीन पर जैसे ही लिखा आया — “रामप्रसाद जी पर बकाया: ₹4,00,000” — हॉल की तीसरी कतार में किसी ने…
कैलकुलेटर के ‘7’ वाले बटन ने उस रात तीसरी बार जवाब दे दिया। सुनीता ने उसे हथेली पर दो बार…
जोशी सर ने कॉपी मेज़ पर इतनी ज़ोर से पटकी कि पहली बेंच पर रखा पानी का गिलास काँप गया।…
रात का तीसरा पहर बीत चुका था, और हनुमान के पास अब बस इतना समय था जितना एक दीया बुझने…
सभा में सैकड़ों आसन थे, पर उस एक वानर के लिए एक भी नहीं। हनुमान जी को रस्सियों से बाँधकर…
पहला घुमाव सबसे भारी था। मंदराचल पर्वत, जिसकी चोटी बादलों में खोई रहती थी, क्षीरसागर के बीचों-बीच खड़ा था —…
खंभा चटका नहीं। वह गरजा। हिरण्यकशिपु की मुट्ठी अभी उस पर पड़ी ही थी कि सभा-भवन के बीचों-बीच खड़ा वह…
पाँच बरस के बच्चे के लिए महल की सीढ़ियाँ बहुत ऊँची होती हैं। उस शाम ध्रुव ने उन्हें पहली बार…
फ़ोन की वह घंटी अब भी उसके कानों में बजती है, हालाँकि रवि ने उसे आठ महीने पहले हमेशा के…
रमेश अंकल की हार्डवेयर की दुकान सुबह नौ बजे खुलती थी, लेकिन उस दिन साढ़े छह बजे ही वो शटर…
खेत में हंसिया चलाते हुए विजय के हाथ रुक गए। माँ खाना लेकर आई थी — चने की पोटली, और…
रात के दो बजकर सत्रह मिनट हुए थे, और हॉस्टल के कमरा नंबर 214 में सिर्फ एक ट्यूबलाइट जल रही…