सुबह का समय था। अंजना माता अपनी कुटिया में सो रही थीं, और उनका नन्हा बेटा — हनुमान — पहली बार अकेला जागा था।
पेट में हल्की-सी भूख थी। हनुमान ने आँखें मलीं, गुफा से बाहर झाँका, और तभी उनकी नज़र आसमान पर पड़ी।
एक बड़ा, गोल, चमकता हुआ लाल-पीला फल — बिल्कुल आम जैसा — ऊँचे नीले पेड़ पर टँगा हुआ था।
“कितना सुंदर फल है!” हनुमान खुशी से चिल्लाए। उन्हें नहीं पता था कि यह कोई साधारण फल नहीं, बल्कि खुद सूर्यदेव थे।
एक छोटे बच्चे की सबसे बड़ी उड़ान
बिना एक पल सोचे, हनुमान ने अपनी नन्ही मुट्ठियाँ भींचीं और आसमान की तरफ छलांग लगा दी।
उनके पिता पवनदेव थे, इसलिए हवा खुद उनकी दोस्त थी। हर छलांग के साथ हनुमान और ऊपर, और ऊपर उड़ते गए — बादलों को पार करते, पंछियों को पीछे छोड़ते।
“रुको फल! मैं आ रहा हूँ!” वे हँसते हुए बोले।
सूर्यदेव ने नीचे देखा और हैरान रह गए। एक इतना छोटा बच्चा, इतनी तेज़ उड़ान से, सीधा उनकी ओर आ रहा था।
आसमान में जब सूरज बन गया निवाला
हनुमान सूर्य के बिल्कुल पास पहुँच गए। उन्होंने अपना मुँह बड़ा-सा खोला और — हड़प! — पूरे सूरज को मुँह में भर लिया।
अचानक पूरी दुनिया अंधेरे में डूब गई। पंछी घबरा गए, फूल मुरझा गए, और नदियाँ चुप हो गईं।
देवताओं में हलचल मच गई। इंद्र देव तुरंत अपने हाथी ऐरावत पर सवार होकर वहाँ पहुँचे।
“यह बालक कौन है, जिसने सूर्य को ही निगल लिया?” इंद्र देव ने पूछा।
किसी ने जवाब देने से पहले ही, इंद्र देव ने अपना वज्र उठाया और उसे धीरे से हनुमान की ठुड्डी पर छुआ दिया — बस उन्हें रोकने के लिए, चोट पहुँचाने के लिए नहीं।
बाल हनुमान की कहानी का सबसे प्यारा मोड़
हल्की-सी चोट लगते ही हनुमान का मुँह खुल गया, और सूरज वापस आसमान में लौट आया। दुनिया फिर से रोशन हो गई।
पवनदेव ने जब अपने बेटे को यूँ चोटिल देखा, तो गुस्से में सारी हवा अपने साथ खींच ली। ना कोई साँस चल पाई, ना कोई पत्ता हिला।
तब सारे देवता एक साथ हनुमान के पास आए। उन्होंने प्यार से उनके सिर पर हाथ फेरा और एक-एक करके उन्हें अनगिनत शक्तियों का वरदान दिया — कभी न थकने वाला बल, आग से ना जलने वाला शरीर, और आसमान जितना ऊँचा उड़ने की क्षमता।
पवनदेव मुस्कुराए, हवा फिर से बहने लगी, और पूरी दुनिया ने राहत की साँस ली।
उस दिन से हनुमान का नाम पड़ा — “हनुमान”, और वे बन गए सबसे प्यारे, सबसे बलशाली बाल देवता, जिनकी एक भूखी छलांग ने आसमान तक हिला दिया था।
आज भी, जब कोई बच्चा किसी बड़े सपने की तरफ बिना डरे दौड़ पड़ता है, बड़े-बुज़ुर्ग मुस्कुराकर कहते हैं — “बिल्कुल बाल हनुमान जैसा है।”
