फ़ोन साइलेंट पर था, फिर भी अनुज हर पंद्रह मिनट में उसे उठाकर देख लेते थे। स्क्रीन पर कुछ नया नहीं था — न कोई मैसेज, न कोई नोटिफिकेशन। 6 मार्च की सुबह अभी दूर थी, और दिल्ली की सर्दी उस रात कुछ ज़्यादा ही चुभ रही थी।
तीसरी बार था यह इंतज़ार। पहले दो बार भी ऐसी ही रातें आई थीं, और दोनों बार सुबह ने वो नहीं दिया था जो अनुज चाहते थे।
फ़ोन साइलेंट, दिमाग़ नहीं
DANICS प्रोबेशनर के तौर पर SDM की ट्रेनिंग पूरी करते हुए, अनुज को पता था कि रिजल्ट कल आएगा। इंटरव्यू 27 फ़रवरी को हो चुका था। पैनल के सामने बैठे उस दिन उन्हें लगा था कि सवाल ठीक-ठाक गए, लेकिन UPSC की परीक्षा में “ठीक-ठाक” और “टॉप” के बीच की दूरी कोई नहीं नाप सकता।
रात के उस सन्नाटे में उनके दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही तस्वीर बार-बार आती रही — रावतभाटा का वो घर, जहाँ उनके पिता रावतभाटा परमाणु ऊर्जा परियोजना में तकनीशियन का काम करते थे, और माँ हर शाम दरवाज़े पर उनके इंतज़ार में खड़ी मिलती थीं।
जब स्टेथोस्कोप की जगह किताबों ने ली
AIIMS जोधपुर से MBBS की डिग्री लेना आसान नहीं था। रावतभाटा के एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल से दसवीं और कोटा के एम.बी. पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बारहवीं करने के बाद, कोटा में ही दो साल NEET की तैयारी में बीते थे। मेडिकल कॉलेज में दाख़िला मिला, इंटर्नशिप शुरू हुई — और फिर एक मोड़ आया।
डॉक्टर बनकर मरीज़ों का इलाज करना अपनी जगह सही था, लेकिन अनुज को लगने लगा था कि नीतियाँ बनाना, सिस्टम बदलना, ज़्यादा बड़े स्तर पर असर डाल सकता है। इंटर्नशिप के साथ-साथ उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू कर दी — बिना किसी कोचिंग के, दिन में तेरह घंटे, अकेले।
यही वो फ़ैसला था जिसने बाद में अनुज अग्निहोत्री की कहानी को बाक़ी टॉपर्स से अलग बना दिया।
दूसरी बार जब नाम लिस्ट में नहीं था
पहला अटेम्प्ट खाली गया। दूसरे अटेम्प्ट में मेन्स तो निकला, लेकिन फाइनल लिस्ट में AIR वाला नाम नहीं आया — हाँ, इतना ज़रूर हुआ कि उन्होंने Union Territories Civil Services (DANICS) क्लियर कर लिया। यह हार नहीं थी, पर टॉप की उम्मीद भी नहीं थी।
DANICS प्रोबेशनर बनकर ट्रेनिंग लेते हुए भी अनुज ने किताबें नहीं छोड़ीं। दिन में ऑफिस की ज़िम्मेदारी, रात में सिलेबस — यह रूटीन तीसरे अटेम्प्ट तक चला। ऑप्शनल सब्जेक्ट के तौर पर मेडिकल साइंस चुना था, जो उनकी MBBS की पढ़ाई से सीधा जुड़ता था।
27 फ़रवरी की वो आख़िरी मुस्कान
इंटरव्यू पैनल से बाहर निकलते वक़्त अनुज के चेहरे पर हल्की मुस्कान थी, लेकिन दिल में कोई गारंटी नहीं। मेन्स में उन्हें 867 अंक मिले थे — यह उन्हें उसी रात पता नहीं था, यह बाद में मार्कशीट से पता चला — और इंटरव्यू में 204। दोनों को जोड़कर कुल 2,025 में से जो स्कोर बना, वही उन्हें देश में पहले स्थान पर ले गया।
पर 27 फ़रवरी की रात को यह सब सिर्फ़ अनुमान था। घर पर बैठे माता-पिता को उन्होंने सिर्फ़ इतना बताया था — “इंटरव्यू हो गया, अब इंतज़ार करना है।”
6 मार्च, सुबह साढ़े सात बजे
रिजल्ट वेबसाइट पर अपलोड होने की ख़बर जैसे ही फैली, अनुज ने पेज खोला। रोल नंबर टाइप किया। लोड होने के उन चंद सेकंड में जो घबराहट थी, वह तीन साल की मेहनत का पूरा निचोड़ थी।
AIR 1 — अपने ही नाम के आगे यह लिखा देखकर पहला रिएक्शन विश्वास न होने का था। माता-पिता उस वक़्त साथ ही मौजूद थे, और घर में जो खुशी फैली, उसे शब्दों में बांधना मुश्किल था।
अनुज अग्निहोत्री की कहानी अब देश भर के उन लाखों अभ्यर्थियों तक पहुँच रही है, जो अपनी दूसरी या तीसरी कोशिश में बैठे हैं, यह उम्मीद लिए कि असफलता आख़िरी शब्द नहीं होती — बस अगला अटेम्प्ट होता है।
इस कहानी से जुड़े सवाल
अनुज अग्निहोत्री UPSC टॉपर 2025 कौन हैं?
अनुज अग्निहोत्री राजस्थान के रावतभाटा (चित्तौड़गढ़ ज़िला) के रहने वाले हैं, जिन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में AIR 1 हासिल किया। रिजल्ट 6 मार्च 2026 को घोषित हुआ था।
अनुज अग्निहोत्री ने UPSC में कौन सा ऑप्शनल सब्जेक्ट लिया था?
उन्होंने मेडिकल साइंस को ऑप्शनल विषय के रूप में चुना, जो उनकी AIIMS जोधपुर से MBBS की पढ़ाई से मेल खाता था।
अनुज अग्निहोत्री का यह कौन सा अटेम्प्ट था?
यह उनका तीसरा अटेम्प्ट था। इससे पहले वे UTCS/DANICS परीक्षा क्लियर कर चुके थे और दिल्ली में SDM प्रोबेशनर के तौर पर ट्रेनिंग ले रहे थे।
