राम-रावण युद्ध की कहानी: मंदोदरी ने जो देखा, वो किसी और ने नहीं देखा
अट्टालिका की ऊँची खिड़की से मंदोदरी नीचे युद्धभूमि को देख रही थी, और उसकी हथेली अपने-आप पेट के उस हिस्से…
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अट्टालिका की ऊँची खिड़की से मंदोदरी नीचे युद्धभूमि को देख रही थी, और उसकी हथेली अपने-आप पेट के उस हिस्से…
पौने छह बजे माँ ने मुझे नींद से हिलाया — “उठ इरा, आज तू देवी है।” मैं आठ साल की…
उस सुबह जब कृष्ण मेरे पास आए, आकाश में अभी भी तारे थे। वो एक ब्राह्मण के वेश में थे।…
बारिश में भीगा हुआ मुकुट उसके हाथ में था, सिर पर नहीं। राजा विक्रमसेन ने पीछे मुड़कर देखा — दूर,…
दरवाज़े के बाहर वही पुरानी लकड़ी की छड़ी टिकी थी, जो तीन साल से किसी हाथ में नहीं उठी थी।…
दादी की उंगलियाँ काँप रही थीं जब उन्होंने पहला दीया जलाया, फिर भी माचिस की तीली उन्होंने मुझे नहीं पकड़ाई।…
कोहरा अभी विंध्य की चोटियों से उतरा नहीं था कि महिषासुर ने अपने सींगों पर पहली किरण महसूस की। ठंडी,…
मुझे आज भी वह पल याद है — जब शिव के हाथों की गर्मी छोड़कर मैं पहली बार किसी और…
मेरे पैरों में कोई खराबी नहीं थी। समस्या ये थी कि मुझे पता ही नहीं चलता था कि वो कब,…
मोर की साँसें उखड़ रही थीं। कार्तिकेय ने उसकी गर्दन पर हाथ फेरा और कैलाश की चोटी को दूर से…