वो फ़ोन जो किसी और ने उठाया
फ़िलाडेल्फ़िया में नवंबर की वो शाम बहुत ठंडी थी। मीरा अपने हॉस्टल के कमरे में बैठी थी, सामने खुली हुई…
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फ़िलाडेल्फ़िया में नवंबर की वो शाम बहुत ठंडी थी। मीरा अपने हॉस्टल के कमरे में बैठी थी, सामने खुली हुई…
सुबह साढ़े पाँच बजे वो अब भी उसी आदत से उठ जाता था। बरसों की आदत। उठते ही उसके कान…
मद्रास से उड़ान भरते वक़्त उसे लगा था कि अमेरिका गरम होगा। फ़िल्मों में तो हमेशा धूप रहती थी। किसी…
क्या आप सोच सकते हैं कि पढ़ाने जाना इतना खतरनाक हो कि हर रोज़ पत्थर और गोबर आपके ऊपर फेंके…
बाहर, व्हीलर द्वीप के ऊपर सूरज अभी पूरी तरह नहीं उगा था। अप्रैल की वो ओड़िशा वाली सुबह थी —…
फाल्गुनी नायर अपने केबिन में बैठी थीं — कोटक महिंद्रा कैपिटल की मैनेजिंग डायरेक्टर। उन्नीस साल इसी इमारत में बीते…
बैंगलोर के उस अस्पताल के बाहर, बरामदे में, वो आदमी बैठा था। चालीस के आसपास उम्र। चेहरे पर वो धूप…
एक पुराना मिट्टी का तेल वाला लैंप। काला पड़ चुका शीशा, जंग खाई हुई बत्ती घुमाने वाली चकरी, और नीचे…
सब-इंस्पेक्टर निर्मल सिंह को फोन उसी दुकानदार का था जिसे वो पिछले हफ़्ते से समझा रहे थे — गाड़ियाँ सड़क…
फियांग, लद्दाख। जनवरी 2013। ज़मीन इतनी ठंडी थी कि सोनम वांगचुक के जूतों के नीचे मिट्टी पत्थर की तरह लग…