राजा और नवरात्रि व्रत की कहानी — जंगल की वो नौ रातें
बारिश में भीगा हुआ मुकुट उसके हाथ में था, सिर पर नहीं। राजा विक्रमसेन ने पीछे मुड़कर देखा — दूर,…
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बारिश में भीगा हुआ मुकुट उसके हाथ में था, सिर पर नहीं। राजा विक्रमसेन ने पीछे मुड़कर देखा — दूर,…
दरवाज़े के बाहर वही पुरानी लकड़ी की छड़ी टिकी थी, जो तीन साल से किसी हाथ में नहीं उठी थी।…
दादी की उंगलियाँ काँप रही थीं जब उन्होंने पहला दीया जलाया, फिर भी माचिस की तीली उन्होंने मुझे नहीं पकड़ाई।…
कोहरा अभी विंध्य की चोटियों से उतरा नहीं था कि महिषासुर ने अपने सींगों पर पहली किरण महसूस की। ठंडी,…
मुझे आज भी वह पल याद है — जब शिव के हाथों की गर्मी छोड़कर मैं पहली बार किसी और…
मेरे पैरों में कोई खराबी नहीं थी। समस्या ये थी कि मुझे पता ही नहीं चलता था कि वो कब,…
मोर की साँसें उखड़ रही थीं। कार्तिकेय ने उसकी गर्दन पर हाथ फेरा और कैलाश की चोटी को दूर से…
द्वार पर खड़े उस बालक को नहीं पता था कि वह जिस आदमी को अंदर जाने से रोक रहा है,…
आधी रात को गोकुल के फाटक पर एक परछाई रुकी। इतनी सुंदर कि पहरेदार पलक झपकाना भूल गए, इतनी शांत…
यमुना का वह जहरीला पानी कालिया नाग को याद नहीं कब आखिरी बार उसने खुला आसमान देखा था। रत्नाकर की…