हनुमान जी ने सीना चीरकर राम दिखाए — दरबार की वो कहानी जो लिखी नहीं जा सकी
देवशर्मा राजदरबार का लेखक था। तीस बरस से उसकी कलम अयोध्या के हर उत्सव, हर निर्णय, हर विवाह को शब्दों…
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देवशर्मा राजदरबार का लेखक था। तीस बरस से उसकी कलम अयोध्या के हर उत्सव, हर निर्णय, हर विवाह को शब्दों…
पाताल लोक के फाटक पर मशालें बुझने का नाम नहीं ले रही थीं। वहाँ एक पहरेदार अकेला खड़ा था —…
रावण की सभा में उस दिन ठहाके गूँज रहे थे। एक वानर — सिर्फ एक वानर — उसके सिंहासन के…
आकाश में उस सुबह कुछ अजीब हो रहा था। सूर्यदेव अपने रथ पर हर दिन की तरह पूर्व से पश्चिम…
मुझे जलाया गया था झूठ बोलने के लिए। यह बात मुझे तब नहीं पता थी — तब मैं सिर्फ एक…
तुंगभद्रा नदी की धार पर अभी भी वही धुला हुआ कपड़ा फैला था, जब पानी के नीचे कुछ हिला। बूढ़े…
रात गहरी थी, और कैलाश पर्वत चाँदनी में किसी सोए हुए देवता की तरह पड़ा था। रावण अकेला खड़ा था…
समुद्र की लहरें उस रात कुछ ज़्यादा ही तेज़ थीं, जैसे उन्हें पहले से पता हो कि आज कुछ टूटने…
आग की लपटें दीवारों पर नाच रही थीं, पर मेघनाद की आँखें स्थिर थीं। निकुंभला देवी के इस गुप्त मंदिर…
दीया बुझने ही वाला था जब वत्सल ने पहली बार वो चित्र देखा। लंका के राजपुस्तकालय की सबसे भीतरी दीवार…
अट्टालिका की ऊँची खिड़की से मंदोदरी नीचे युद्धभूमि को देख रही थी, और उसकी हथेली अपने-आप पेट के उस हिस्से…
पौने छह बजे माँ ने मुझे नींद से हिलाया — “उठ इरा, आज तू देवी है।” मैं आठ साल की…
उस सुबह जब कृष्ण मेरे पास आए, आकाश में अभी भी तारे थे। वो एक ब्राह्मण के वेश में थे।…
बारिश में भीगा हुआ मुकुट उसके हाथ में था, सिर पर नहीं। राजा विक्रमसेन ने पीछे मुड़कर देखा — दूर,…
दरवाज़े के बाहर वही पुरानी लकड़ी की छड़ी टिकी थी, जो तीन साल से किसी हाथ में नहीं उठी थी।…