सावित्री-सत्यवान की कहानी: वो जंगल जहाँ यम पहली बार रुक गए
यम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा था। लाखों वर्षों में, लाखों आत्माएँ उनकी रस्सी में बँधीं, और वो चल…
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यम ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा था। लाखों वर्षों में, लाखों आत्माएँ उनकी रस्सी में बँधीं, और वो चल…
राजस्थान के खजूर के बागों के बीच एक हवेली थी। सौ साल पुरानी, खिड़कियाँ ईंट से बंद, दीवारें गहरे भूरे…
रविवार की सुबह आशीष के सामने एक पत्र रखा गया था। कागज़ पर कुछ नहीं लिखा था। बस एक लाइन:…
दिल्ली के एक चमकती आवासीय कॉलोनी में, अंकित और प्रिया दोनों अच्छी नौकरियों में थे। अंकित एक टेक कंपनी में…
राहुल और नीता की शादी को आठ साल हो गए थे। शहर के एक ठीकठाक इलाके में एक दो-कमरे का…
समुद्र की लहरें किनारे से टकरा रही थीं, और उससे भी बड़ी लहर वानर सेना के भीतर चल रही थी…
अयोध्या के राजदरबार में उस दिन हँसी रुक नहीं रही थी। चंद्रहास नाम का एक युवा दरबारी सबसे आगे बैठा…
पंडित देवकीनंदन हर मंगलवार शाम अस्सी घाट की एक पुरानी हवेली की छत पर बैठते हैं, और चालीसा शुरू होने…
लंका के सबसे भीतरी हिस्से में एक कोठरी थी, इतनी छोटी कि उसमें खड़ा होना भी मुश्किल था। वहाँ जो…
पक्षीराज गरुड़ जब उड़ान भरते हैं, तो पीछे सिर्फ हवा नहीं छूटती — समय भी थोड़ा लड़खड़ा जाता है। यह…
सरयू का पानी उस दिन शांत नहीं था। अयोध्या के घाट पर हज़ारों लोग खड़े थे, पर किसी की आवाज़…
सुषेण वैद्य की आवाज़ में कंपन था। लक्ष्मण की साँसें उथली होती जा रही थीं, और उनका चेहरा उस रंग…
रात अभी पूरी तरह ढली नहीं थी कि पर्वत की गुफा में एक आवाज़ गूंजी — जो रोना कम, गर्जना…
पाताल लोक के फाटक पर मशालें नहीं जलतीं। वहाँ रोशनी पानी से आती है — नीली, ठंडी, हिलती हुई रोशनी,…
जंगल की वो पगडंडी इतनी संकरी थी कि दो आदमी कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल सकते थे — और…