नवदुर्गा के नौ रूपों की कहानी — दादी की आखिरी नवरात्रि
दादी की उंगलियाँ काँप रही थीं जब उन्होंने पहला दीया जलाया, फिर भी माचिस की तीली उन्होंने मुझे नहीं पकड़ाई।…
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दादी की उंगलियाँ काँप रही थीं जब उन्होंने पहला दीया जलाया, फिर भी माचिस की तीली उन्होंने मुझे नहीं पकड़ाई।…
कोहरा अभी विंध्य की चोटियों से उतरा नहीं था कि महिषासुर ने अपने सींगों पर पहली किरण महसूस की। ठंडी,…
मुझे आज भी वह पल याद है — जब शिव के हाथों की गर्मी छोड़कर मैं पहली बार किसी और…
कैलाश पर्वत के उत्तरी द्वार के पास एक छोटा सा हाथी का बच्चा हर शाम अकेला खड़ा रहता था। उसकी…
मेरे पैरों में कोई खराबी नहीं थी। समस्या ये थी कि मुझे पता ही नहीं चलता था कि वो कब,…
मोर की साँसें उखड़ रही थीं। कार्तिकेय ने उसकी गर्दन पर हाथ फेरा और कैलाश की चोटी को दूर से…
रात के पौने दो बजे मीरा की आँख खुली, और पहला ख़याल दिमाग़ में यही आया — बिस्तर पर वो…
द्वार पर खड़े उस बालक को नहीं पता था कि वह जिस आदमी को अंदर जाने से रोक रहा है,…
सोने के फाटक के सामने सुदामा के पांव जैसे मिट्टी में गड़ गए। हाथ की मुट्ठी और कस गई —…
आधी रात को गोकुल के फाटक पर एक परछाई रुकी। इतनी सुंदर कि पहरेदार पलक झपकाना भूल गए, इतनी शांत…
यमुना का वह जहरीला पानी कालिया नाग को याद नहीं कब आखिरी बार उसने खुला आसमान देखा था। रत्नाकर की…
जंजीरों की आवाज़ अचानक बंद हो गई। वासुदेव को पहले लगा कि उनके कान धोखा दे रहे हैं। मथुरा की…
सुबह के पौने आठ बजे थे जब हवलदार विक्रम ने डाक की उस थैली से भूरे रंग का एक छोटा…
अलमारी के सबसे ऊपर वाले खाने में वीवान को वो डिब्बा मिला, जो पिछले साल भी वहीं रखा था —…
नदी के घाट पर हर साल एक दीया जलता था जिसे कोई नहीं बुझाता था। यमुना उसे खुद जलाती, खुद…