करवा चौथ की पौराणिक कहानी: वो धागा जिसने यमराज को झुका दिया
तुंगभद्रा नदी की धार पर अभी भी वही धुला हुआ कपड़ा फैला था, जब पानी के नीचे कुछ हिला। बूढ़े…
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तुंगभद्रा नदी की धार पर अभी भी वही धुला हुआ कपड़ा फैला था, जब पानी के नीचे कुछ हिला। बूढ़े…
रात गहरी थी, और कैलाश पर्वत चाँदनी में किसी सोए हुए देवता की तरह पड़ा था। रावण अकेला खड़ा था…
समुद्र की लहरें उस रात कुछ ज़्यादा ही तेज़ थीं, जैसे उन्हें पहले से पता हो कि आज कुछ टूटने…
आग की लपटें दीवारों पर नाच रही थीं, पर मेघनाद की आँखें स्थिर थीं। निकुंभला देवी के इस गुप्त मंदिर…
दीया बुझने ही वाला था जब वत्सल ने पहली बार वो चित्र देखा। लंका के राजपुस्तकालय की सबसे भीतरी दीवार…
अट्टालिका की ऊँची खिड़की से मंदोदरी नीचे युद्धभूमि को देख रही थी, और उसकी हथेली अपने-आप पेट के उस हिस्से…
पौने छह बजे माँ ने मुझे नींद से हिलाया — “उठ इरा, आज तू देवी है।” मैं आठ साल की…
उस सुबह जब कृष्ण मेरे पास आए, आकाश में अभी भी तारे थे। वो एक ब्राह्मण के वेश में थे।…
बारिश में भीगा हुआ मुकुट उसके हाथ में था, सिर पर नहीं। राजा विक्रमसेन ने पीछे मुड़कर देखा — दूर,…
दरवाज़े के बाहर वही पुरानी लकड़ी की छड़ी टिकी थी, जो तीन साल से किसी हाथ में नहीं उठी थी।…
दादी की उंगलियाँ काँप रही थीं जब उन्होंने पहला दीया जलाया, फिर भी माचिस की तीली उन्होंने मुझे नहीं पकड़ाई।…
कोहरा अभी विंध्य की चोटियों से उतरा नहीं था कि महिषासुर ने अपने सींगों पर पहली किरण महसूस की। ठंडी,…
मुझे आज भी वह पल याद है — जब शिव के हाथों की गर्मी छोड़कर मैं पहली बार किसी और…
कैलाश पर्वत के द्वार के पास एक छोटा सा हाथी का बच्चा हर शाम अकेला खड़ा रहता था। गणेश जी…
मेरे पैरों में कोई खराबी नहीं थी। समस्या ये थी कि मुझे पता ही नहीं चलता था कि वो कब,…