गोठे की मिट्टी अभी भी गीली थी।
रात के किसी पहर में बारिश रुकी थी, और अब सिर्फ़ छप्पर से बूँदें टपक रही थीं — एक, फिर…
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रात के किसी पहर में बारिश रुकी थी, और अब सिर्फ़ छप्पर से बूँदें टपक रही थीं — एक, फिर…
लैपटॉप की स्क्रीन नीली चमक रही थी, लेकिन अर्जुन की उंगलियां कीबोर्ड से दस मिनट पहले ही रुक चुकी थीं।…
रजीव मल्होत्रा ने क्लासरूम के दरवाज़े की कुंडी पर हाथ रखा, और फिर हाथ वापस खींच लिया। अंदर से तीस…
सुबह साढ़े पाँच बजे नैना की आँख खुली, इससे पहले कि रोहन रोए। यही उसका नया अलार्म था — डर,…
फोन की घंटी बजी तो अनन्या को याद ही नहीं आया कि आखिरी बार ये आवाज़ कब सुनी थी। रविवार…
आकाश में उस रात सूर्य की लपटें कुछ ज़्यादा ही काँप रही थीं। धरती पर कोई नहीं जानता था कि…
बारिश होने से पहले का वो वक्त होता है ना — जब हवा थोड़ी ठंडी हो जाती है और आसमान…
रात के तीसरे पहर महल की खिड़की के पास एक बूढ़ी औरत बैठी थी। उसके हाथ काँप रहे थे —…
काशी के घाटों पर शाम उतर रही थी जब सेठ धनराज शर्मा ने अपने नौकर से कहा — “रथ रोको।”…
समंदर की उस तह पर, जहाँ सूरज की रोशनी पानी में घुलकर हरी हो जाती थी, एक मछली रहती थी…
सुबह छह बजे महेश की आँख खुली तो सबसे पहले उसके दाहिने हाथ ने काँपना शुरू किया। ये कोई नई…
अठारहवें दिन की शाम को, जब युद्ध समाप्त हो चुका था, गांधारी ने पहली बार अपनी आँखों की पट्टी खोली।…
बम्बई, 1952। रेकॉर्डिंग स्टूडियो की सीढ़ियाँ उतरते हुए ज़ोहराबाई के हाथ में वही पुराना काला पर्स था जो उन्होंने 1944…
बैग पर अब भी एक कार्टून मछली बनी थी, जिसका एक पंख धुलते-धुलते फीका पड़ गया था। मीरा कुछ देर…
एक जुलाई की सुबह, जब सातवीं बी के बच्चे अपनी नई क्लास में घुस रहे थे, हरिप्रसाद शर्मा भोपाल के…